राष्ट्रपति मुर्मू की मॉरीटानिया में ऐतिहासिक यात्रा: कूटनीति और सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूती देना


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राष्ट्रपति मुर्मू की मॉरीटानिया में ऐतिहासिक यात्रा: कूटनीति और सहयोग के माध्यम से द्विपक्षीय संबंधों को मज़बूती देना
भारतीय राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 16 अक्टूबर, 2024 को नौकचॉट में मॉरीतानिया के राष्ट्रपति मोहम्मद ओल्ड गज़ौनी से मुलाकात की।
राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मू अल्जीरिया, मॉरीतानिया और मलावी के तीन देशों की यात्रा पर हैं।
एक महत्वपूर्ण कूटनीतिक घटना में, राष्ट्रपति द्रौपदी मुर्मु ने 16 अक्टूबर, 2024 को मॉरीतानिया का ऐतिहासिक दौरा किया। यह पश्चिमी अफ्रीकी राष्ट्र के प्रति भारतीय राष्ट्रपति की पहली यात्रा थी, जो भारत और मॉरीतानिया के बीच बढ़ते संबंधों का प्रमाण है। यह यात्रा राष्ट्रपति मुर्मु के तीन देशों के दौरे का हिस्सा है, जिसमें अल्जीरिया, मॉरीतानिया, और मलावी शामिल हैं।

नौकचोट-ओम्टुन्सी एयरपोर्ट पर उनके आगमन पर, राष्ट्रपति मुर्मु का मॉरीतानिया के इस्लामी गणराज्य के राष्ट्रपति मोहम्मद उल्द गाज़ुआनी ने गर्मजोशी से स्वागत किया। उनके सम्मान में एक समारोही अभिनंदन आयोजित किया गया, जो द्विपक्षीय संबंधों को मजबूत करने में यात्रा के महत्व का प्रतीक है।

कूटनीतिक संबंधों की मजबूती: मुख्य वार्ता और समझौता ज्ञापन

राष्ट्रपति मुर्मु की यात्रा का सबसे प्रमुख हिस्सा उनकी नौकचोट में राष्ट्रीय महल में राष्ट्रपति गाज़ुआनी से मुलाकात थी। प्रतिनिधिमंडल स्तरीय वार्ताओं के दौरान, दोनों नेताओं ने दोनों राष्ट्रों के बीच सहयोग को मजबूत करने की दिशा में चर्चाओं में भाग लिया। वार्ताओं में आर्थिक सहयोग, मानव संसाधन विकास, और सांस्कृतिक आदान-प्रदान जैसे मुख्य क्षेत्रों पर ध्यान केंद्रित किया गया।

यात्रा का एक महत्वपूर्ण परिणाम भारत और मॉरीतानिया के बीच चार समझौते ज्ञापन (MoUs) के हस्ताक्षर और आदान-प्रदान था। ये MoUs निम्नलिखित क्षेत्रों में सहयोग को बढ़ाने का उद्देश्य रखते हैं:

दूतों की प्रशिक्षण: दोनों देशों के दूतों की पेशेवर क्षमताओं को मजबूत करना।

सांस्कृतिक आदान-प्रदान: द्विपक्षीय पहलों के माध्यम से सांस्कृतिक समझ और सहयोग को बढ़ाना।

वीजा छूट: भारत और मॉरीतानिया के बीच कूटनीतिक और औचितिक पासपोर्ट धारकों के लिए यात्रा की सुविधा देना।

विदेश कार्यालय परामर्श: दोनों देशों के विदेश मंत्रालयों के बीच संवाद को बढ़ावा देना, जिससे कूटनीतिक संचार सुचारु हो सके।


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